द 80-ईयर-ओल्ड वॉल

बुज़ुर्गों की मेंटल हेल्थ के स्पेशलिस्ट, 61 साल के साइकेट्रिस्ट डॉ. हिदेकी वाडा ने हाल ही में "द 80-ईयर-ओल्ड वॉल" नाम की एक किताब पब्लिश की है। इसके रिलीज़ होते ही इसकी बिक्री तेज़ी से बढ़ी—500,000 से ज़्यादा कॉपी बिकीं, और उम्मीद है कि इसकी 1 मिलियन कॉपी तक पहुँच जाएगी। इस साल जापान में इसके बेस्टसेलर बनने की संभावना है।
यहाँ डॉ. वाडा की 44 ज्ञान की बातें हैं जिन्हें पढ़ना और शेयर करना ज़रूरी है, खासकर अपने बुज़ुर्ग प्रियजनों के साथ:

1. रोज़ टहलते रहें, भले ही यह धीमा हो।

2. जब परेशान हों, तो गहरी साँस लें और शांत हो जाएँ।

3. अपने शरीर को अकड़ने से बचाने के लिए हल्की एक्सरसाइज़ करें।

4. अगर आप गर्मियों में एयर कंडीशनिंग इस्तेमाल कर रहे हैं, तो खूब पानी पिएँ।

5. ज़रूरत पड़ने पर डायपर पहनने में शर्मिंदा न हों—वे असल में हमें ज़्यादा आज़ादी से चलने-फिरने में मदद करते हैं।

 6. खूब चबाने से दिमाग और शरीर ज़्यादा एक्टिव रहते हैं।

7. भूलने की बीमारी उम्र की वजह से नहीं, बल्कि दिमाग का सही इस्तेमाल न होने की वजह से होती है।

8. सभी समस्याओं का इलाज बहुत ज़्यादा दवा से करने की ज़रूरत नहीं होती।

9. अपना ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर कम करने के लिए खुद पर ज़बरदस्ती न करें।

10. अकेले होने का मतलब अकेलापन नहीं है; यह आराम करने का समय हो सकता है।

11. आलसी होना नॉर्मल है, खासकर अगर आप थके हुए हों।

12. अगर आप सेफ़ तरीके से गाड़ी नहीं चला सकते, तो चोट लगने से बेहतर है कि रुक ​​जाएं।

13. वो काम करें जो आपको पसंद हों, उन चीज़ों से बचें जिनसे स्ट्रेस होता है।

14. आप बूढ़े हो सकते हैं, लेकिन नैचुरल इच्छाएं अभी भी महसूस हो सकती हैं।

15. सिर्फ़ घर पर न बैठें - थोड़ी ताज़ी हवा लें और बाहर की दुनिया देखें।

16. जो आपको पसंद हो वो खाएं, बस ज़रूरत से ज़्यादा न खाएं। थोड़ा वज़न ठीक है।

 17. हर काम धीरे-धीरे और ध्यान से करें।

18. उन लोगों से दूर रहें जो आपको असहज महसूस कराते हैं।

19. टीवी और सेल फ़ोन के सामने कम समय बिताएं।

20. कभी-कभी ज़बरदस्ती इलाज करवाने के बजाय अपनी बीमारी के साथ समझौता करना बेहतर होता है।

21. "हमेशा कोई न कोई रास्ता होता है" - यह बात तब ताकत दे सकती है जब हम फंसा हुआ महसूस करें।

22. ताज़े फल और सब्ज़ियाँ खाना ज़रूरी है।

23. नहाने का समय लंबा होना ज़रूरी नहीं है, बस 10 मिनट ही काफ़ी हैं।

24. अगर आपको नींद नहीं आ रही है, तो ज़बरदस्ती न करें।

25. जो चीज़ें आपको खुश करती हैं, वे आपके दिमाग को एक्टिव रख सकती हैं।

26. पीछे न हटें; बस वही कहें जो आप कहना चाहते हैं।

27. शुरू में ही कोई ऐसा फ़ैमिली डॉक्टर ढूंढें जिस पर आपको भरोसा हो।

28. हमेशा हार मानने की ज़रूरत नहीं है। कभी-कभी "बुरे पेरेंट" बनना भी हेल्दी होता है।

 29. अगर हमारी राय बदल जाए तो कोई बात नहीं।

30. ज़िंदगी के आखिर में डिमेंशिया होना भगवान का हमें शांत करने का तरीका हो सकता है।

31. अगर हम सीखना बंद कर दें, तो हम बहुत जल्दी बूढ़े हो जाते हैं।

32. इज़्ज़त के पीछे भागने की कोई ज़रूरत नहीं है - हमारे पास अभी जो है, वही काफ़ी है।

33. मासूमियत माता-पिता का खास अधिकार है।

34. ज़िंदगी में मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन यही इसे दिलचस्प बनाता है।

35. धूप सेंकने से आप खुश हो सकते हैं।

36. दूसरों के लिए अच्छा करने से आपको अच्छी चीज़ें मिलती हैं।

37. हर दिन आराम से जिएं।

38. इच्छाएं होना इस बात का संकेत है कि आप अभी भी ज़िंदा और मोटिवेटेड हैं।

39. हमेशा पॉज़िटिव सोचें।

40. राहत की सांस लें; ज़िंदगी में जल्दबाज़ी करने की ज़रूरत नहीं है।

41. आप तय करें कि आप अपनी ज़िंदगी कैसे जीना चाहते हैं।

 42. जो कुछ भी हो, उसे शांत दिल से स्वीकार करें।

43. खुशमिजाज लोग आमतौर पर पसंद किए जाते हैं।

44. एक मुस्कान कई आशीर्वाद ला सकती है।

कृपया यह मैसेज उन सभी माता-पिता और बुजुर्गों के साथ शेयर करें जिन्हें आप जानते हैं।

क्योंकि वे खुशी से, हेल्दी तरीके से जीने और शांति से अपने बुढ़ापे का आनंद लेने के हकदार हैं। 🌿🙂

हमेशा हेल्दी रहें🙏🏻💪☕

जो प्राप्त है वही पर्याप्त है

0️⃣2️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

           *!! चार मोमबत्तियां !!*
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

रात का समय था। चारों ओर पूरा अंधेरा छाया हुआ था। केवल एक ही कमरा प्रकाशित था। वहाँ चार मोमबत्तियाँ जल रही थी।

चारों मोमबत्तियाँ एकांत देख आपस में बातें करने लगी। पहली मोमबत्ती बोली, “मैं शांति हूँ, जब मैं इस दुनिया को देखती हूँ, तो बहुत दु:खी होती हूँ। चारों ओर आपा-धापी, लूट-खसोट और हिंसा का बोलबाला है। ऐसे में यहाँ रहना बहुत मुश्किल है। मैं अब यहाँ और नहीं रह सकती।” इतना कहकर मोमबत्ती बुझ गई।

दूसरी मोमबत्ती भी अपने मन की बात कहने लगी, “मैं विश्वास हूँ, मुझे लगता है कि झूठ, धोखा, फरेब, बेईमानी मेरा वजूद ख़त्म करते जा रहे हैं। ये जगह अब मेरे लायक नहीं रही। मैं भी जा रही हूँ।” इतना कहकर दूसरी मोमबत्ती भी बुझ गई।

तीसरी मोमबत्ती भी दु:खी थी। वह बोली, “मैं प्रेम हूँ, मैं हर किसी के लिए हर पल जल सकती हूँ। लेकिन अब किसी के पास मेरे लिए वक़्त नहीं बचा। स्वार्थ और नफरत का भाव मेरा स्थान लेता जा रहा है। लोगों के मन में अपनों के प्रति भी प्रेम-भावना नहीं बची। अब ये सहना मेरे बस की बात नहीं। मेरे लिए जाना ही ठीक होगा।” कहकर तीसरी मोमबत्ती भी बुझ गई।

तीसरी बत्ती बुझी ही थी कि कमरे में एक बालक ने प्रवेश किया। मोमबत्तियों को बुझा हुआ देख उसे बहुत दुःख हुआ। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। दु:खी मन से वो बोला, “इस तरह बीच में ही मेरे जीवन में अंधेरा कर कैसे जा सकती हो तुम। तुम्हें तो अंत तक पूरा जलना था। लेकिन तुमने मेरा साथ छोड़ दिया। अब मैं क्या करूंगा?”

बालक की बात सुन चौथी मोमबत्ती बोली, “घबराओ नहीं बालक, मैं आशा हूँ और मैं तुम्हारे साथ हूँ। जब तक मैं जल रही हूँ, तुम मेरी लौ से दूसरी मोमबत्तियों को जला सकते हो।”

चौथी मोमबत्ती की बात सुनकर बालक का ढांढस बंध गया। उसने आशा के साथ शांति, विश्वास और प्रेम को पुनः प्रकाशित कर लिया।

*शिक्षा:-*
जीवन में समय एक जैसा नहीं रहता। कभी उजाला रहता है, तो कभी अँधेरा। जब जीवन में अंधकार आये, मन अशांत हो जाये, विश्वास डगमगाने लगे और दुनिया पराई लगने लगे। तब आशा का दीपक जला लेना। जब तक आशा का दीपक जलता रहेगा, जीवन में कभी अँधेरा नहीं हो सकता। आशा के बल पर जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है। इसलिए आशा का साथ कभी ना छोड़ें।

सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

दीर्घकालिक सोच: सफलता की कुंजज

दीर्घकालिक सोच: सफलता की कुंजी 

अध्ययनों से पता चला है कि सफलता का सबसे अच्छा पूर्वानुमानकर्ता “दीर्घकालिक सोच” (Long-Term Thinking) है। जो लोग बार-बार इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि वे भविष्य में कहां पहुंचना चाहते हैं, वे वर्तमान में बेहतर निर्णय लेते हैं। ऐसे लोग आमतौर पर स्वस्थ भोजन करते हैं, कार्यस्थल पर अधिक उत्पादक होते हैं और दूसरों की तुलना में अधिक धन की बचत व निवेश करते हैं।

हावर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. एडवर्ड बैनफील्ड ने सफलता पर व्यापक शोध करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण वित्तीय और व्यक्तिगत सफलता का सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक है। उन्होंने "दीर्घकालिक" को परिभाषित किया — "वर्तमान में निर्णय लेते समय कई वर्षों आगे तक सोचने की क्षमता।"

लेकिन वर्तमान समय में ऐसा करना आसान नहीं है।

हमारी दीर्घकालिक सोच और ध्यान को कई बाहरी शक्तियाँ भंग कर देती हैं, जो हमें तात्कालिक सुख (Instant Gratification) की ओर खींच ले जाती हैं।

हम अक्सर जानते हैं कि हमें क्या करना चाहिए — फिर भी हम वह नहीं करते। उदाहरण के लिए:

हमें पता है कि हमें स्वस्थ भोजन करना चाहिए, लेकिन हम मिठाइयों और शक्करयुक्त पेयों पर टूट पड़ते हैं।

हमें पढ़ाई करनी चाहिए, लेकिन हम नेटफ्लिक्स पर एक और सीरीज देखना शुरू कर देते हैं।

हमें व्यायाम के फायदे पता हैं, लेकिन हम सोशल मीडिया पर दोस्तों से बात करना ज़्यादा पसंद करते हैं।


मेरा मानना है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट ने हमारी दीर्घकालिक सोच और एकाग्रता की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि Apple के CEO स्टीव जॉब्स ने अपने बच्चों को फोन या टैबलेट इस्तेमाल नहीं करने दिया — जबकि उनका व्यवसाय इन्हीं को बेचने का था!

फेसबुक के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और अरबपति निवेशक चमथ पालीहपितिया का कहना है कि हमें अपने मस्तिष्क को दीर्घकालिक सोच के लिए पुनः प्रशिक्षित (rewire) करना चाहिए, जिसकी शुरुआत अपने फोन से सोशल मीडिया एप्स को हटाने से होती है। उनके शब्दों में, ऐसे ऐप्स "आपके मस्तिष्क को त्वरित प्रतिक्रिया की लत लगा देते हैं।"

जब हमें हर समय लाइक्स, कमेंट्स या मैसेज का जवाब तुरंत मिलने लगता है, तो हम हर चीज़ में तुरंत परिणाम की अपेक्षा करने लगते हैं। ये अनुभव "जल्दी अमीर बनने" वाली योजनाओं और मानसिक पक्षपात (Cognitive Biases) से और मज़बूत हो जाते हैं — जहाँ हम केवल सफल यूट्यूबरों को देखते हैं, विफल लोगों को नहीं।

इसका परिणाम यह होता है कि:

हमारी सोच सतही और तात्कालिक बन जाती है।

हमारी वास्तविकता की समझ विकृत हो जाती है।

हम ग़लत विश्वास पाल लेते हैं जैसे कि:

"सफलता जल्दी और आसान होनी चाहिए।"

"पैसे कमाने या वजन घटाने के लिए मेहनत की ज़रूरत नहीं।"

धीरे-धीरे हम खुद को दूसरों से कमतर समझने लगते हैं। हमें लगता है कि हम पर्याप्त बुद्धिमान या अनुशासित नहीं हैं। इस हीनता को छुपाने के लिए हम अंधाधुंध मेहनत करने लगते हैं — जल्दी सफलता पाने की खोज में। इस दौड़ में हम एक बहुत जरूरी मूल्य खो देते हैं: धैर्य (Patience)।

सच यह है:

दिन भर मोटिवेशनल वीडियो देखने से लक्ष्य प्राप्त नहीं होते।
लेकिन, रोज़ किए गए छोटे-छोटे कार्य, जो लंबे समय तक लगातार किए जाएं, वही असली परिणाम लाते हैं।
हर दिन एक काम पर ध्यान केंद्रित करना — शांति के साथ — यही रास्ता है।

दीर्घकालिक सोच की एक उत्तम मिसाल है — Amazon

यह कंपनी 1994 में शुरू हुई थी लेकिन पहली बार मुनाफा 2003 में हुआ। उस साल $149 मिलियन के घाटे के बाद उसे केवल $35 मिलियन का मुनाफा हुआ।

संस्थापक जेफ बेजोस शायद चाहते तो इससे पहले भी मुनाफा कमा सकते थे, लेकिन उन्होंने कंपनी में फिर से निवेश कर उसकी नींव मजबूत की ताकि यह दशकों तक टिक सके।
आपको भी यही करना चाहिए — अपनी ज़िंदगी की नींव धीरे-धीरे, लेकिन मजबूती से बनाइए।
ऐसी नींव जो पहले ही झटके में ढह न जाए।

याद रखें:

 "दीर्घकालिक सोच ही आपके लक्ष्य प्राप्त करने का ‘गुप्त मंत्र’ है।"

लेकिन यह आज या कल नहीं होगा। इसके लिए धैर्य और निरंतरता की कला सीखनी होगी।
इसके लिए आपको ध्यान भटकाने वाली चीजों को हटाना होगा, जैसे कि ज्यादा उत्तेजना देने वाली गतिविधियाँ।

निष्कर्ष:

आज की दुनिया आपके डोपामिन न्यूरोट्रांसमीटर को हाईजैक करने के लिए डिज़ाइन की गई है — ये आपके भले के लिए नहीं, बल्कि आपकी जेब को खाली करने के लिए बनाई गई है।

इसका दूसरा और अधिक हानिकारक परिणाम यह होता है कि:

आपकी एकाग्रता की शक्ति समाप्त हो जाती है,

आपको खुद के प्रति हीन भावना होती है,

और आप जीवन के उन कठिन कार्यों को नहीं कर पाते जो वास्तव में सबसे बड़ा सकारात्मक परिवर्तन ला सकते थे।


इसलिए अपने मस्तिष्क को दोबारा प्रशिक्षित कीजिए — दीर्घकालिक सोच के लिए।
तभी आप वास्तव में वहां पहुंच पाएंगे जहां आप भविष्य में होना चाहते हैं।

अपने लक्ष्य पर ध्यान



♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️

          ! अपने लक्ष्य पर ध्यान !

एक बार की बात है। एक तालाब में कई सारे मेढ़क रहते थे। उन मेढ़कों में एक राजा मेंढक था। एक दिन सारे मेढ़कों ने कहा, क्यों न कोई प्रतियोगिता खेली जाए। तालाब किनारे एक पेड़ था। राजा मेंढक ने कहा कि “जो भी इस पेड़ पर चढ़ जाएगा, वह विजयी कहलाएगा।

सारे मेढ़कों द्वारा यह प्रतियोगिता स्वीकार कर ली गई और अगले दिन उस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता मैं भाग लेने के लिए सभी मेंढक तैयार थे। जैसे ही प्रतियोगिता शुरू हुई एक एक कर के उस पेड़ पर चढ़ने लगे। कुछ मेढ़क ऊपर चढ़ते गए और फिर फिसलते गए। फिर नीचे गिर जाते थे।

ऐसे ही कई मेंढक ऊपर चढ़ते रहे और फ़िसलते रहे और फिर नीचे गिर जाते। इसी बीच कुछ मेढ़क ने हार मान कर चढ़ना बन्द कर दिया। परंतु कुछ मेढ़क चढ़ते रहे, जो मेढ़क नहीं चढ़ पाए थे और छोड़ दिया था। वह कह रहे थे कि “इस पर कोई चढ़े ही नहीं पाएगा। यह असंभव है, असंभव है।”

इस पर कोई नहीं चढ़ सकता। जो मेंढक दोबारा चढ़ रहे थे, उन्होंने भी हार मान ली। परंतु उनमें से एक मेंढक लगातार प्रयास करता रहा। लगातार प्रयास करने के कारण अंत में वह पेड़ पर चढ़ गया और सभी मित्रों द्वारा तालियां बजाई गई और सबने उससे चढ़ने का कारण पूछा । उनमें से एक ने पीछे से एक ने कहा यह तो बहरा है, इसे कुछ सुनाई नहीं देता। उस बहरे मेंढक के एक दोस्त ने उससे पूछा तुमने यह कैसे कर लिया। उसने कहा मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। मुझे लग रहा था कि नीचे खड़े यह लोग मुझे प्रोत्साहित कर रहे हैं कि तुम कर सकते हो। अब तुम ही हो तुम कर सकते हो और मैं आखिरकार इस पेड़ पर चढ़ गया।

सबने उसकी खूब तारीफ की और उसे पुरस्कृत किया गया।

शिक्षा:-
इस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें सिर्फ अपने लक्ष्य पर केंद्रित होना चाहिए दुनिया क्या कहती है, उस पर ध्यान बिल्कुल नहीं देना चाहिए।

सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

मित्रता

मित्रता एक ऐसा संबंध है जो विश्वास, आपसी सम्मान और सहयोग पर आधारित होता है। मित्रों के साथ व्यवहार करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए:

1. ईमानदारी और पारदर्शिता – मित्रता में झूठ या छल-कपट नहीं होना चाहिए। जो भी कहें, स्पष्ट और सच्चा कहें।


2. समय और सम्मान दें – मित्रों की भावनाओं और समय का सम्मान करें। जब वे ज़रूरत में हों, तो उनकी सहायता करें।


3. स्वार्थ रहित मित्रता – मित्रता लेन-देन का रिश्ता नहीं है। अगर आप केवल स्वार्थ के लिए मित्रता रखते हैं, तो यह टिकाऊ नहीं होगी।


4. विश्वास और गोपनीयता बनाए रखें – मित्र आप पर भरोसा करें, इसके लिए ज़रूरी है कि उनकी बातें दूसरों से साझा न करें।


5. मित्रों की सफलता में खुश रहें – प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या से बचें। मित्रों की सफलता का आनंद लें और उनकी प्रगति में सहयोग करें।


6. समस्याओं को संवाद से हल करें – यदि किसी बात पर मतभेद हो, तो उसे खुलकर बातचीत के ज़रिए हल करें।


7. खुशियों और दुखों में साथ दें – सच्ची मित्रता वही होती है जो सिर्फ सुख में नहीं, बल्कि कठिन समय में भी साथ निभाए।


8. मित्रों को सही राह दिखाएँ – अगर मित्र गलत राह पर जा रहे हों, तो उन्हें विनम्रता से सही दिशा दिखाने की कोशिश करें।


9. स्वस्थ सीमाएँ बनाए रखें – मित्रता में स्वतंत्रता का सम्मान करें और अत्यधिक हस्तक्षेप से बचें।


10. हास्य और सकारात्मकता बनाए रखें – मज़ाक करें, हंसें और माहौल को खुशनुमा बनाए रखें, लेकिन कभी भी किसी की भावनाओं को ठेस न पहुँचाएँ।



अच्छे मित्र वही होते हैं जो जीवनभर एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं और एक-दूसरे के व्यक्तित्व को निखारने में मदद करते हैं।

भीम में 10000 हाथियों का बाल कहां से आया

महाभारत कथा दुर्योधन की चाल से भीम को मिला हजारों हाथियों का बल, जानिए पौराणिक कथा

महाभारत ग्रंथ (Mahabharat Katha) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है। इस ग्रंथ में ऐसी कई कथाएं मिलती हैं जो किसी भी व्यक्ति को हैरत में डालने के लिए काफी हैं। आज हम आपको महाभारत में वर्णित एक ऐसा घटना के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बाद भीम को 10 हजार हाथियों का बल मिल गया।

By Suman SainiEdited By: Suman SainiUpdated: Thu, 10 Apr 2025 01:54 PM (IST)


Mahabharata Story दुर्योधन ने चली थी ये चाल।

HighLights

  1. वेदव्यास द्वारा रचित है महाभारत ग्रंथ।

  2. मिलता है कई अद्भुत कथाओं का वर्णन।

  3. महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक हैं भीम।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। द्वापर युग में पांडवों और कौरवों के बीच एक भीषण युद्ध लड़ा गया था, जिसे हम सभी महाभारत युद्ध के नाम से जानते हैं। पांच पांडवों में से एक भीम को लेकर यह कहा जाता है कि उनमें 10 हजार हाथियों का बल था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें यह बल कैसे मिला। अगर नहीं, तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।

दुश्मनी का भाव रखता था दुर्योधन

महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार, दुर्योधन भीम से बचपन में ही बहुत ईर्ष्या करता था, क्योंकि भीम सभी खेलों में कौरवों को हरा देते थे। जब दुर्योधन ने सभी पांडवों समेत भीम को गंगा तट पर खेलने के लिए बुलाय। दुश्मनी की भावना के चलते दुर्योधन ने भीम के खाने में जहर मिला दिया, जिस कारण भीम अचेत हो गए। मौका पाकर दुर्योधन ने अपने भाई दु:शासन के साथ मिलकर भीम को गंगा में फेंक दिया।

जहर का असर हुआ कम

यह विडियो भी देखें

भीम अचेत अवस्था में ही नदी के द्वारा नागलोक पहुंच गए। जब भीम को होश आया, तो उन्होंने पाया कि वह भयंकर सांपों से घिरे हुए हैं। सांपों के काटने के कारण भीम के शरीर से जहर का असर कम हो गया था। उन्होंने सांपों को मारना शुरू कर दिया, जिससे डरकर सभी सांप नागराज वासुकी के पास गए और उन्हें पूरी बात बताई। तब नागराज वासुकि, आर्यक नाग के साथ भीम के पास पहुंचे।

यह भी पढ़ें - Mahabharat: आखिर क्यों भगवान कृष्ण ने शिशुपाल को दी थी 100 अपराध करने की छूट?

(Picture Credit: Freepik) (AI Image)

आर्यक नाग के कारण मिला बल

तब आर्यक नाग भीम को पहचान गए और उनसे नागलोक आने की वजह पूछी। तब भीम ने उन्हें सारी बात बताई, जिसके बाद उन्होंने भीम को कुंडों का रस पिलाया था, जिसमें 10 हजार हाथियों का बल था। जब भीम वापस लौटा तो दुर्योधन को बहुत ही आश्चर्य हुआ।

पांडव भी भीम को वापस आते हुए देखकर काफी खुश थे और यह महसूस कर सकते थे कि भीम अब पहले से अधिक बलवान नजर आ रहे हैं। सभी अचरज में पड़ गए कि यह चमत्कार कैसे हुआ।


सच्चे मित्र की पहचान

सच्चे मित्र की पहचान
       जीवन मे दोस्तों का होना बेहद जरूरी होता है। दोस्त सही मायने में हमारे प्रशंसक और आलोचक होते है। लेकिन कौन वास्तव में सच्चा मित्र है और कौन क़रीबी या विश्वशनीय नही है,इसकी पहचान जरूरी है।
     हमारे जीवन मे कुछ लोग ऐसे होते है जिनसे बातें करते समय हमें किसी दिखावे की जरूरत नहीँ होती है। बस जो दिल में आया कह दिया। ये ही लोग हमारे दोस्त होते है। लेकिन कई बार हमारे द्वारा बनाये गए दोस्त हमें भी अपना दोस्त समझें, ऐसा नहीँ होता है। हमारा असल दोस्त कौन है ये जानना कई बार मुश्किल होता है। लेकिन कुछ आदतों के ज़रिए पता लगाया जा सकता है कि आपका सच्चा मित्र कौन है?
         मजाक उड़ाना- दोस्ती में मजाक ही मौज-मस्ती है। दोस्ती में मजाक एक आम क्रिया-कलाप के अंतर्गत आती है। मजाक दोस्ती में उर्वरक का काम करती है। लेकिन जब ये मज़ाक बाहरी लोगों के सामने हो तो बुरा लगना लाज़मी है। आपका सच्चा दोस्त मज़ाक तो उड़ाएगा पर इस बात का भी ख़्याल रखेगा कि कोई बाहरी व्यक्ति तो साथ मे या सामने नहीं है। यदि भूलवश अनजान लोगों के सामने ऐसा कर देता है तो वो इसके लिए माफ़ी मांगने में भी संकोच नहीं करता है।

कमी उज़ागर करना- दोस्त एक-दूसरे की कमियों को अच्छी तरह से जानते है। लेकिन उसे प्रकट करने में दिलचस्पी लेने के बजाय वे उन्हें दूर करने में साथ देते है। जबकि नाम के लिए दोस्त कहे जाने वाले लोग सामने वाले कि कमियों को उजागर करने के साथ उन्हें शर्मिंदा भी करते है।

सच्चे मित्रों में चतुरता का अभाव- सच्चा मित्र आपसी सम्बन्धों में सदैव भावना प्रधान होता है। लेकिन बनावटी मित्र सम्बन्धों में सदैव बुद्धि का प्रयोग कर चतुरता प्रदर्शित करते है।

    अच्छी आदतों को  प्रोत्साहित करना- सच्चा मित्र अपने मित्र की अच्छी आदतों को सदैव प्रोत्साहित करता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। जहाँ तक हो सके उसकी हर प्रकार से मदद करता है।

दुखी होना- सच्चा मित्र सदैव आपके दुःख में दुःखी होगा और उसे कम करने के लिए हर सम्भव प्रयास करेगा। लेकिन बनावटी मित्र को आपके दुःख से कुछ लेना देना नहीं होता है।

अपनी बात को ही महत्व देना- मित्र मंडली में कुछ लोग सामने वाले की बात सुनने के बजाय अपनी कहना अधिक पसंद करते है। यदि कोई मित्र इन्हें अपना समझकर अपनी समस्या बताता है तो ऐसे मित्र उनकी बातों में रुचि नहीं लेते है, लेकिन अपनी बात कहने के लिए ये किसी की बात काटने से भी नहीं चूकते। लेकिन असल मित्र आपकी समस्या सुनने पर पूरा ध्यान देते है।

विकास में रुकावट- बनावटी मित्र आपके आगे बढ़ने पर कदापि खुश नहीं होते है।ये आपके द्वारा किये गए अच्छे कार्य मे भी कोई न कोई कमी निकल ही देते है। ऐसे लोग आपका आत्मविश्वास भी कम करने का प्रयास करते है, जबकि सच्चा मित्र आपकी हर सफलता पर खुशी से झूम उठता है।

खिलाफ भड़काना- बनावटी मित्र सदैव आपके खिलाफ़ आपके अच्छे मित्र/ मित्रों को भड़कते है। आपकी अनुपस्थिति में भी  आपकी अच्छाई को बुराई के रूप में उसके समक्ष प्रस्तुत करतेहै।

तुरन्त खीझ जाना- अपनी जरूरत होने पर ये आपको फोन, मैसेज करेंगे और तुरन्त जबाब न मिलने पर ये खीझ जाते है।
आपकी किसी अन्य दोस्त से बात होने पर ये असुरक्षित महसूस करते है। हाँ, आपके द्वारा फोन या मैसेज करने पर इनका तुरन्त जबाब न देना जायज़ हो सकता है लेकिन,  इसके साथ ही मिस्ड कॉल देखकर दोबारा काल करना भी जरूरी नहीं समझते।
        सच्चे मित्र को इन बातों से फर्क नहीं पड़ता हैं। वे आपके नए दोस्तों के साथ भी आसानी से घुलमिल जाते हैं। इसके साथ ही ये आपका फोन न उठा पाने पर बाद में फोन या मैसेज के माध्यम से व्यस्त होने की जानकारी दे कर खेद प्रकट करते है।

निजता का सम्मान- बनावटी दोस्त आपके निजी जीवन मे जरूरत से ज्यादा दख़ल देते है। आप कहाँ, किसके साथ जा रहे है? इन्हें आपके हर बात की जानकारी चाहिए। ये आपके जीवन पर पूरी तरह नियंत्रण रखना चाहते है। वहीं दूसरी तरफ आपके सच्चे मित्र आपकी निजता का सम्मान करते है। आपके पारिवारिक मामलों में भी दख़ल देने से बचते है। ये आप पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं चाहते हैं। कििसी ने 

ज़िंदगी का ये हुनर भी आज़माना चाहिये। 

जंग अगर दोस्तों से हो तो हार जाना चाहिये

द 80-ईयर-ओल्ड वॉल

बुज़ुर्गों की मेंटल हेल्थ के स्पेशलिस्ट, 61 साल के साइकेट्रिस्ट डॉ. हिदेकी वाडा ने हाल ही में "द 80-ईयर-ओल्ड वॉल" नाम की एक किताब ...