“तुम दिल में रहो”
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रिश्ता बनाया है तो निभाएँगे,
हर मोड़ पे साथ ही आएँगे।
तुमसे ही रूठेंगे हम कभी,
तुमको ही फिर से मनाएँगे।।
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तुम दिल में रहो इतना ही बहुत,
साँसों में महकते रहना तुम।
दूरी चाहे जितनी भी हो,
आँखों में चमकते रहना तुम।।
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तुमसे बातें, तुमसे शिकवे,
तुमसे ही हर अफ़साना है।
भीड़ भरी इस दुनिया में,
बस तेरा साथ सुहाना है।।
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कभी हँसी बनकर आ जाना,
कभी आँसू बन बह जाना।
अगर कभी हम खो भी जाएँ,
तुम बनकर राह दिखाना।।
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मुलाक़ातों की चाह नहीं,
बस एहसास तुम्हारा काफी है।
दिल के इस छोटे से घर में,
एक नाम तुम्हारा काफी है।।
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तुमसे ही लड़ना अच्छा लगे,
तुमसे ही प्यार जताएँगे।
ये रिश्ता साँसों जैसा है,
मरते दम तक निभाएँगे।।
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तुम दिल में रहो इतना ही बहुत,
मिलने की कोई ज़रूरत नहीं।
कुछ रिश्ते रूह में बसते हैं,
उनकी कोई दूरी नहीं।।
— प्रमोद कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुति
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