पैसे से सब मिल जाता है, पर वो स्पर्श नहीं मिलता,
थके हुए माथे को फिर वैसा हर्ष नहीं मिलता।
दुनिया भर की भीड़ में सब रिश्ते शर्तों वाले हैं,
मां ही बस वो रिश्ता है, जिसके हम मतवाले हैं।
कोरोना काल में शिक्षा के माध्यम से मानवीय जीवन के पक्षों को जानने और उनके विकास की अभिलाषा
पंख और घोंसला एक भूल, हज़ार साल घोंसला बनाने में हम यूँ मशगूल हो गए, कि उड़ने को पंख भी थे, ये हम भूल गए। तिनका-तिनका जोड़ते...
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