कोई बात बने


कोई बात बने

मेरे लिखने से क्या, जो तुम ना पढ़ो,  
तुम पढ़ लो जरा तो कोई बात बने।

मेरे सोचने से क्या, जो तुम ना समझो,  
तुम समझ लो जरा तो कोई बात बने।

मैं चुप रहूं तो क्या, जो तुम ना बोलो,  
तुम बोल दो जरा तो कोई बात बने।

मैं फूल बनूं तो क्या, जो महक ना आए,  
तुम खुशबू बनो तो कोई बात बने।

मेरे चाहने से क्या, जो एहसास ना हो,  
तुम महसूस करो तो कोई बात बने।

मैं बेरंग रहूं तो क्या, जो तुम ना रंगो,  
तुम रंग भरो तो कोई बात बने।

मेरे हाथ बढ़े तो क्या, तुम रुके रहो,  
तुम भी हाथ बढ़ाओ तो कोई बात बने...!!


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