प्रेम सरोवर

जानते हो …
प्रेम एक बार उतर जाए तो
सिर्फ़ याद नहीं बनता,
वह आदत, 
आदर और आत्मा का हिस्सा हो जाता है।

वह चला भी जाए
तो भीतर एक कमरा छोड़ जाता है
जहाँ स्मृतियाँ साँस लेती रहती हैं।

प्रेम की मृत्यु दरअसल
पूर्ण अंत नहीं होती,
वह हमें थोड़ा-सा अधूरा छोड़ जाती है।

हर बार जब प्रेम मरता है,
हम जीते तो रहते हैं…
पर भीतर कहीं
एक धड़कन हमेशा के लिए
चुप हो जाती है।

…और सच ये है—
वही चुप धड़कन
हमें उम्र भर सुनाई देती रहती है।

हम हँसते हैं, मिलते हैं, आगे बढ़ते हैं,
पर किसी मोड़ पर अचानक
वो नाम फिर से दिल में उतर आता है।

नया प्रेम आता भी है तो
पुराने की जगह नहीं लेता,
बस उसके बगल में
एक और कमरा बना देता है।

और इंसान…
पूरा कभी नहीं भरता फिर,
बस जीना सीख जाता है
उन अधूरे कमरों के साथ।

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