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मर्द की थकी हुई मुस्कान

सुबह-सुबह फिर निकल पड़ा वो, कंधों पर संसार लिए, अपने हिस्से धूप न माँगी, सबके लिए बहार लिए। घर की खुशियों की खातिर ही, हर दर्द द...