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प्रिय विरह

शिव विरह गीत कैलाशों पर धूनी जलती, मन में फिर भी शोर है, भोले तेरे बिना ये जीवन जैसे सूना भोर है। गंगा भी अब मौन खड़ी है, चाँद भी फीका...